Monday, July 14, 2014

मैं अक्सर कहा करता हूँ कि कभी भी किसी से बी कुछ भी सीखा जा सकता है - उम्र कभी अक्ल का पैमाना नहीं होता ..

बेटा खुशी खुशी घर आया और माँ को मिठाई देते हुए कहा - मेरे मित्र के यहाँ उसकी नयी बहन आई है - यह ले मीठाई

माँ ने कहा - मरदूद किसी के यहाँ बेटी हुई तो तू क्यों उछल रहा है- नालायक

बेटे ने कहा - माँ कल हमारे यहाँ दीदी की शादी हो और मोहल्ले का कोई भी तेरे घर न आए - चेहरा लटका कर बैठा रहे तो तुझे उस में मज़ा आएगा क्या ?

माँ ने बेटे को गले लगा लिया और कहा तूने मेरी आँखें खोल दी बेटे 

दूसरों की खुशी का हिस्सा बानिए - भगवान खुशी के मौके बार बार नहीं देते
ज़ख़्म ज़माने ने जितने दिए -उतने और किसी को न मिले 
हर एक मनमें प्यार हो प्रभु - दीप जले सदा और फूल खिले //
नाम-ओ-निशान मिटे रंजिशका - उलफत के महफ़िल ही सजे 
एक मन एक जान हों सब - यहाँ दिल से दिल का तार मिले //
चोट लगे किसी एक को गर - हर एक आँखों में आँसू छलके 
कोई खुशी में डूबा हो जब - हर एक लब पर तबस्सुम खिले //
मिनी ने कहा जो तू सुधरेगा नहीं - इसका तू अफ़सोस न कर
अपनाता जा तू इन राहों पर चाहे फूल मिले या खार मिले //
कोई गैर नहीं यहाँ 'कुंदन' हर कोई तेरा तो अपना ही है 
गाता जा तराना यही तू - करता जा दुआ कि हो सबके भले //
एक लघु हास्य कथा

बेटा - पिता जी कहा जाता है दुनिया में कोई ऐसा नहीं जिसे गाना और रोना न आता हो
पिता - हाँ बेटे पुरानी कहावत है 
बेटा - यह सच है क्या ?
पिता - बिल्कुल सच है बेटा - सिर्फ़ समय समय का फेर है
बेटा - मैं समझा नहीं - ज़रा स्पष्ट रूप से समझाइये 
पिता - शादी से पहले जीवन में गाना ही गाना -----
बेटा - बाकी रहने दीजिए -- समझ गया शादी के बाद क्या होता है आपको देख कर
एक और पीड़ादायक लघु कथा

चारों तरफ लहलहता खेत - फसलों की भरमार- सुखी और संपन्न ग्रामवासी - ऐसा एक गाँव खोजना नहीं पड़ता था पहले - हर गाँव ऐसा हुआ करता था पहले
सरकार को फसल से अधिक लुभाया गाँव के लोगों का वोट - बैंकों की शाखाएँ खुलने लगी धड़ाधड़ गाँव में - जिनके पास पैसे थे उनसे जमा लिए और लोगों को लोन देना शुरू किया - सरकारी लोग और असाधु बैंक के कार्मिकों ने बहकाना शुरू किया लोगों को लोन वापस न करने को- क़र्ज़ माफी होने लगी - लोग आलसी होने लगे - जिन्होने बैंक में जमा किए थे अपनी क़िस्मत पे रोने लगे जमा पर व्याज कम होता देख कर
गाँव से शहर की तरफ भागने लगे लोग रोज़गार की तलाश में - बैंक का लोन डकार कर जो पड़े रहे गाँव में अब किसी काम के न रहे - जिन गाँव में कभी हरियाली हुआ करती थी आज वहाँ बंजर खेत. और बदहाली
नतीजा - आलासियों की बढ़त - पैदावार कम - फसल और सब्ज़ियों के कीमत आसमान पर - यही है देन बैंकों के राष्ट्रीयकरण का - और 5 साल बाद जिसकी मनेगी स्वर्ण जयंती - धन्य हैं देश के लूटेरे नेता - बैंक कर्मचारी और दलाल
थोड़ा सा मनोरंजन हो जाए अब -

बेटा - पिता जी- अपने देश में लोक तंत्र वाली राजनीति है न ?
पिता - हाँ बेटे
बेटा - तो फिर लोग जब किसी भी बात को ले कर प्रदर्शन करते हैं शांतिपूर्ण ढंग से - तो उन्हे पुलिस के डंडे क्यों पड़ते हैं बताइए 
पिता - बेटा शासन की गद्दी पर जो हो कुछ भी कर सकता है 
बेटा - यह बात तो सच है - पर इसके पीछे तर्क क्या है- बताइए 
पिता - पता नहें बेटे - तू ही बता 
बेटा - कहा यह जाता है - राजनीति में कूटनीति आवश्यक है - और जब कूटने की बात आए तो जनता के अलावा और कौन है जिसे सरकार कूटे ?
ठीक कहा न बेटे ने ?
एक लघु कथा
बहुत बड़े डॉक्टर थे यह - इनसे बात करने के लिए भी हफ्ते भर पहले नंबर लगाना पड़ता था इनके क्लिनिक पर - सारे शहर में मशहूर ..
उनका बच्चा अचानक एक दिन बीमार पड़ गया - स्कूल से लौटा तो तबीयत बिगड़ी हुई थी- पत्नी ने आकर कहा सुनो मुन्ने की तबीयत कुछ ठीक नहीं है- ज़रा चल कर एक बार देख तो लो.
डॉक्टर साहब ने सुना - फोन उठाया और नंबर लगाया - कुछ बातें की - कुछ ही देर में एक और डॉक्टर आ पहुँचे इन के यहाँ . बच्चे को देखा दवा लिख दी और इन्हे पूछा आप खुद इतने बड़े डॉक्टर हैं तो फिर मुझे आपने किस लिए बुलाया भला
इन्होने जवाब दिया मैं इतना बड़ा डॉक्टर हूँ और मैं छोटे केस नहीं लेता उपर से मेरी फीस भी तो आपसे कहीं ज़्यादा है
ऐसे जानकार को मूरख कहने में क्या बुराई है बताइए - समाज ऐसे पंडितों से भरा पड़ा है
चुटकुला 

पति और पत्नी में बड़े ज़ोर से बहस छिड़ी थी - पत्नी का कहना था कि महिलाओं को हर युग में अत्याचार सहना पड़ता है - पति इससे सहमत नहीं था 

पति ने कहा देखो कटता कौन है मुर्गा और बकरा - मुर्गी और बकरी नहीं 

पत्नी ने कहा पशु पक्षी के उदाहरण मत दो

पति ने कहा ठीक है चलो बाहर घूमने चलते हैं वहीं बताऊँगा 

पत्नी ने कहा - बाहर क्यों ?

तुम हिसाब लगाना कितने गंजे मर्द देखे और मैं हिसाब लगाऊँगा कितनी महिलाएँ देखी जिनकी खोपड़ी सफाचट है- पता चल ही जाएगा किस पर अधिक अत्याचार होता है .

पत्नी ने सर झुका लिया कहा मुझे नहीं जाना है कहीं ...